Tuesday, 10 October 2017

परिचर्चा

टीवी पर परिचर्चा सुनो पांच छ  बोलते चले जाते हैं कोई  नहीं सुनता है लगता है कक सम्मलेन हो रहा है बेचारा संयोजक चीखता ही रहता है कितनी गले के दर्द की दवाई खता होगा बेचारा 

Friday, 6 October 2017

facts

since the sixth century the japanese throne has been occupied by a member of the same family Hirohito.

Mother

M      is for milion things she gave me
O       means only that she”s growing old
T       is for the tears she shed to save me.
H       is for her heart of purest gold
E       is for her eyes with love light shining
R       means right and right she”ll always be put them all together they spell mother a word that
means the world to me  

                             (Howard Johnson)  

Tuesday, 3 October 2017

देवी देव मनाएंगे

सच हम  भी न कुछ अजीब हैं न  त्यौहार के नाम पर  कितना बिगा ड़ते हैं हर त्यौहार बेचैनी लेकर अता  है जी घबडाता है  नव दुर्गा के नाम पर होने नदियों को प्रदूषित किया  उनमे जहर घोला  अपने देवी देवताओं को बहा कर अपमान किया  अब हम  नो दिन  सयम से रह लिए अब तुम जाओ अब फिर हमे वहशत भरी जिंदगी जीने दो जिसे हम पूजते हैं उसको पैरों टेल रोंदते हैं यह हमारी श्रद्धा है  देवी के आगे पूरी हाला का ढेर लगते जाएंगे  उस पर पानी आदि डालते जायेंगे  पुजारी उसे सरकता जायेगा और सुबह मंदिर की सफाई के साथ कूड़े के ढेर पर पड़ी होंगी इतनी दुर्दशा के साथ कि देवी तो क्या ढोर भी नहीं छूटे है  पानी मैं मूर्तियों पर लगा जहरीला रंग घुलता है फिर हम सर्कार को गली देते हैं कि पीला पानी आरहा था  मन करने पर की नदियों मैं मूर्ती मत  फैंको आस्था का सवाल आ जाता है जो पानी की सफाई के लिए गली दे रहे थे अब आस्था के लिए रोने लगते हैं
  कन्या पूजा करते हैं बच्चियों का झुण्ड बिना नहाये प्लास्टिक की थैलिया लेकर  सुबह ही निकल पड़ती हैं थैलों का वजन नहीं उठ पाता  तो कहीं किनारे पूड़ियों को पटक पैसे और सामान लेकर जाती हैं अष्टमी के दिन मैंने  जैसे ही लिफ्ट मैं कदम रखा देख कर सिहर गई कोने मैं पूरी हलुआ पड़ा था दस पंद्रह लड़कियों का झुण्ड सुबह ही अपरमेन्ट मैं घुस गया था दोसो घरों मैं से काम से काम सौ फ्लैटों से आवाज आई थी गॉडर्ड  लड़कियों को भेज दो  एक एक कर उनके पेट और बड़े बड़े थैले भर गए  इतना घर ले जाकर भी क्या होगा सभी छोटे भाई  लाएंगे अभी तो और घरों से आवाज आरही थी पैसे साथ लाये थैले मैं अलग से डाले तश्तरी बिस्कुट या अन्य सामन भरा पूरिया लिफ्ट कोने मैं उंडेली और पहुँच गए दुसरे फ्लैट मैं कोई कोई बच्ची टी आठ साल की   पांच साल ढ ऊँगली पकडे थी और साल भर की गॉड मैं अब सबका सामान कैसे उठ ले तब जो वास्तु सबसे काम उपयोगी है व्ही टी फिकेगी  यह हमारी आस्था है पता नहीं इससे कौन सी देवी प्रसन्न हुई और कौन सी नाराज अन्नपूर्ण तो जरूर गुस्सा हुईहोंगीं 

Tuesday, 26 September 2017

jindagi

ge rqe g¡ls jks;s feydj ;gh rks ftUnxh gS
bl dnj Hkh u g¡ls jks;s [kqnk dks gh g¡luk iM+s
f[kykSus gS ge rqe lHkh VwVdj fc[kjuk gh fu;fr gS

fc[kj tk;sa u le; ls igys gh ;gh ;kn j[kuk ftUnxh gSA

कौन apna

अनजान चेहरे अपने से लगते हैं
खास अपने अनजान से रहते हैं
दुःख हो तो मुहं  फेर लेते हैं
सुख देख कर जलते रहते हैं 

Saturday, 23 September 2017

छुट्टी ही chutti

भारत मैं अनेक धर्म हैं अंक रंग हैं वर्ण हैं सम्रदाय हैं उनके अपने अपने त्यौहार हैं  अपने अपने पूज्य हैं हर धर्म हर वर्ग हर जाति  चाहती है कि  वह भी  समाज मैं जाने जय यदि एक हिन्दू धर्म की छुट्टी है  एक हिन्दू संत की जयंती है उनके भी गुरुओं की भी छुट्टी मिले राष्ट्रीय त्योहारों के आलावा भी भारत मैं पर्व और त्योहारों की छुट्टी कॉलेज दफ्तरों मैं की जाती है और धीरे दीरे संह्क्य बढ़ रही है एक के बाद एक नै मांग बढती है कि उनके मान्य के नाम की भी छुट्टी की जाये। छुट्टी करने से तात्पर्य क्या है यह समझ नहीं आता है कि तात्पर्य क्या है बड़े पर्व और त्यौहार पर छुट्टी समझ आती है कि हंसी ख़ुशी से परिवार के साथ पर्व मनाया जाये होली दिवाली ईद क्रिसमस आदि पर धीरे धीरे बढती जयंतियों पर  कहाँ तक उचित है इन पर छुट्टी मांगने वाले बता सकते हैं उससे किसका भला होगा देश का बच्चों का व्यापार का इंडस्ट्री का या सरकारी कामकाज का बैंकों आदि का छुट्टी के नाम पर घर पर बैठना किसी को यह भी न पता लग सके कि किस बात की छुट्टी है एक आलस्य भरा दिन और बच्चो की पढाई से मुक्ति पर देश का बच्चों के भविष्य का अहित साथ ही यह नहीं मालूम जिस की जयंती के लिए छुट्टी की जा रही है वह कौन था
क्या इससे अच्छा यह नहीं है कि बाकायदा कॉलेज दफ्तरों मैं अंतिम दो घंटे मैं उस व्यक्ति के जीवन चरित्र से सम्बंधित कार्यक्रम आयोजित किये जाये जिससे उनकी पढाई का भी हर्ज न होय और उनके ज्ञान की भी वृधी  होगी साथ ही प्रचार होगा साथ ही प्रचार भी होगा कि हमारे देश मैं इसे भी व्यक्ति हुए हैं।
बैंक दफ्तरों के प्रारंभ होने से पहले कुछ समय उस व्यक्ति विशेष के  विषय मैं बताया जाये जयंती यह सार्थक होगी या छुट्टियाँ बढाकर हम अपने देश को बर्बाद करने मैं सहायक हो रहे हैं एक दिन शीघ्र आएगा की ३६५ दिन छुट्टी के हो जायेंगे वैसे तो अफ़सोस है की हमारे यहाँ कितने कम हैं कितनी कम छुट्टी के योग्य हैं सभी जातियां अपने अपने धर्म गुरुओं के नाम पर छुट्टी लें बाकि तो लूटपाट उधम दंगा जुलूस तो है हिन् जब काम करना ही नहीं है तो कुछ तो करेगा  तोड़फोड़ ही सही सोचते हैं की सररकार का नुक्सान कर रहे हैं पर यह नहीं जानते सरकार के पास पैसा किसका है  जनता का ही है उसका ही नुक्सान है